श्वसन सम्बन्धी योग (Yoga and Breathing)

by Acharya Shashikant · 0 comments

श्वसन सम्बन्धी योग बहुत ही लाभप्रद होता है.इस योग से शरीर मन और आत्मा तीनों के बीच सामंजस्य स्थापित होता है.यह योग सेहत और स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभप्रद होता है.

श्वसन सम्बन्धी योग के नियमित अभ्यास से श्वसन सम्बन्धी परेशानियां दूर होती है.इस योग के अभ्यास से श्वसन की प्रक्रिया सुचारू और बेहतर होती है.योगाभ्यास करते समय जब श्वसन सम्बन्धी योग करते हैं तो इससे मन एकाग्र हो जाता है और दूसरे योगों को ध्यान से कर पाने में आप सक्षम होते हैं.श्वासन की क्रिया में जब सांस छोड़ते हैं तब शरीर और मन पर बना तनाव धीरे धीरे दूर होता जा जाता है और रिलैक्स महसूस करने लगते हैं.इस योग को करते समय जब सांस लेते हैं तब सहज और सामान्य रहना चाहिए.सांस की क्रिया में बल लगाने की जरूरत नहीं होती.सांस लेते समय गहरी सांस लें लेकिन धीरे धीरे. श्वास सम्बन्धी अभ्यास का उद्देश्य श्वसन सम्बन्धी विसंगतियों को दूर करना और उसे लयात्मक बनाना है इसलिए योग करते समय इस बात पर गौर करना चाहिए कि श्वसन क्रिया सामान्य हो.जब आप श्वास की रफ्तार को समझने लगते हैं तो श्वास पर धीरे धीरे नियंत्रण करना आप सीख लेते हैं.इस योग को ज़मीन पर लेट कर अथवा आराम की मुद्रा में बैठकर कर सकते हैं.

श्वसन योग की प्रक्रिया (Breath Awareness Exercising)

पीठ के बल लेट कर घुटनों को मोड़ लें और तलवों को ज़मीन से पूरी तरह लगाए रखें.नाक से गहरी सांस लें और सांस छोड़ें.श्वास छोड़नें की आवाज पर ध्यान लगाना चाहिए.श्वसन में कौन कौन से अंग गतिमान होते हैं इस पर भी मन को केन्द्रित करना चाहिए.इस क्रिया को कम से कम 5 मिनट तक कई बार दुहराना चाहिए.

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पेट से श्वसन (Abdominal Breath)

योग में जब पेट से श्वसन करते समय पेट की मांसपेशियों को सामान्य स्थिति में बनाए रखना चाहिए.योग की क्रिया में पेट सामान्य भाव से फैलना चाहिए.इस योग को करते समय आपको अपने पेट में सांस लेने और छोड़ने की क्रिया को महसूस करना चाहिए.इस योग को आप दिन में कभी भी अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं.आप इसे पीठ के बल लेट कर सकते हैं अथवा किसी आराम कुर्सी पर बैठकर भी कर सकते हैं.जिनका रक्तचाप (Blood Pressure) कम हो उन्हें यह योग किसी चिकित्सक से सलाह लेने के बाद ही करना चाहिए.

योग की पक्रिया

योग शुरू करते समय आराम की मुद्रा में ज़मीन पर पीठ के बल लेटना चाहिए.हथेलियों को पेट पर हल्के से रखना चाहिए.दोनों हाथों की मध्यमा उंगली नाभि पर एक दूसरे स्पर्श करता रहे.धीरे धीरे सांस छोड़ते हुए पेट को ज़मीन की दिशा में ले जाइये.फिर धीरे धीरे सांस खींचते हुए पेट को फुलाइये.इस क्रिया को 5 मिनट तक बार बार दुहराना चाहिए.

पेट से श्वसन के लाभ (Benefits of Breathing Yoga)

इस योग के अभ्यास से सांस गहराई तक पहुंचती है और फेफड़ों के नीचले हिस्से भी सांस की प्रकिया में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं.इस योग के अभ्यास से शरीरिक और मानसिक शांति एवं आराम मिलता है.

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Vivek Mehra February 14, 2009 at 11:50 am

Great article on yogic breathing. Thanks. Can you please write articles on the various Yogic positions?

Thanks

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