
प्रतिदिन कम से कम 5 मिनट श्वसन सम्बन्धी योग करना चाहिए ताकि हमारे शरीर में जीवनदायिनी प्राण का संतुलन बना रहे और जो अंग प्राण के असंतुलन से समुचित प्रकार से कार्य नहीं कर पा रहे हैं वे कार्य करने लगे
योग में श्वसन की गति पर ध्यान देने की विशेष आवश्यकता होती है. योगाभ्यास के क्रम में सांस प्रश्वास क्रिया से पेट की मांसपेशियों, फेफड़ो, हृदय और पसलियों के सम्पर्क में आने वाले मांसपेशियो का भी व्यायाम हो जाता है. प्रतिदिन कम से कम 5 मिनट श्वसन सम्बन्धी योग करना चाहिए. इस क्रिया में स्वच्छ आक्सिजन के लिए नाक से सांस लेना चाहिए.
योग में श्वसन सम्बन्धी टिप्स (Breathing tips in Yoga)
योग में श्वास प्रश्वास की क्रिया को काफी महत्व दिया गया है. श्वसन एक स्वेच्छिक क्रिया है जो निरन्तर चलता रहता है. हम जो सांस लेते हैं वह जीवनदायिनी होती है अत इसे प्राण वायु कहते हैं. इस प्राणवायु को ग्रहण करने और सांस छोड़ने की क्रिया यूं तो सामान्य लगती है परंतु इस श्वसन चक्र को सही प्रकार से समझ कर सांस प्रश्वास की क्रिया को योग के माध्यम से किया जाए तो यह काफी लाभप्रद होता है. जब आप योग करते समय श्वास प्रश्वास करते हैं उस समय ध्यान रखना चाहिए कि जिस स्थान पर आप यह योग कर रहे हैं वहां पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ और शुद्ध हवा मौजूद हो. वस्त्रों का भी ख्याल रखना चाहिए. चुस्त वस्त्रों की जगह योग के समय ढ़ीले ढाले और हल्के वस्त्र पहनने चाहिए. जिन लोगों को हृदय और फेफड़ों से सम्बन्धी किसी प्रकार की परेशानी है उन्हें चिकित्सक से परामर्श करने के बाद ही इस योग का अभ्यास करना चाहिए.
योग और प्राण (Yoga and Prana)
प्राण का दूसरा आर्थ जीवन भी है. जब तक शरीर में प्राण है तब तक शरीर जीवित है. यह प्राण वायु रूप में होता है जो अदृश्य रूप से वर्तमान रहता है. जब हम सांस लेते हैं तो सांस के साथ हमारे शरीर में प्राण वायु पहुंचता है और शरीर की कोशिकाओं में जीवन का संचार करता है. योग में गहरी सांस लेने का मूल उद्देश्य यह होता है कि हमारे शरीर में जीवनदायिनी प्राण का संतुलन बना रहे और जो अंग प्राण के असंतुलन से समुचित प्रकार से कार्य नहीं कर पा रहे हैं वे कार्य करने लगे. प्राण शक्ति का संचार मस्तिष्क मे चेतना के द्वारा को खोल देता है और मानसिक क्षमता को बढ़ाता है. यह शरीर को स्वस्थ एवं शक्तिशाली बनाने में भी सहायक होता है.
श्वसन योग मुद्रा (Breathing Yogmudra)
श्वसन योग मुद्रा का एक महत्वपूर्ण तत्व होता है. श्वसन से ध्यान केन्द्रित होता है और योग मुद्रा में किसी प्रकार की परेशानी से भी काफी हद तक बचाव होता है. जब आप तेज तेज सांस लेते हैं तो यह इस बात का संकेत होता है कि आप सहज रूप से सांस नहीं ले रहे हैं बल्कि विशेष बल का प्रयोग कर रहे हैं. इस प्रकार से श्वसन क्रिया करना उचित नहीं होता है. जब आप योग कर रहे हों तो आपको अनावश्यक रूप से सांस को रोकने की चेष्टा नहीं करनी चाहिए. योग के क्रम में गहरी और लम्बी सांस लेनी चाहिए. सांस लेने का क्रम योग की मुद्रा के अनुसार होना चाहिए.