गर्भावस्था में योग (Yoga and Pregnency)

by Acharya Shashikant · 0 comments

गर्भावस्था के दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से कई प्रकार के संवेदनात्मक और भावनात्मक बदलाव होते रहते हैं. इस अवस्था में योग विशेष रूप से लाभप्रद है परंतु योग करते समय कुछ सावधानियों की भी आवश्यकता है. गर्भावस्था के दौरान योग के लाभ और सावधानियों पर आइये बात करें.

गर्भधारण से पूर्व योगाभ्यास की शुरूआत करने से शरीर धीरे धीरे योग के अनुकूल होता जाता है.  इसका लाभ गर्भावस्था के दौरान योग करते समय प्राप्त होता है.  गर्भावस्था के दौरान शरीर के अंगों में तनाव आने लगता है.  नियमित योग करने से शरीर में लोच बना रहता है जिससे इस अवस्था में भी योग क्रिया करने में विशेष परेशानी नहीं आती है.  जो लोग गर्भधारण के पश्चात योग शुरू करते हैं उन्हें शुरू में कुछ परेशानी महसूस होती है.  इस अवरस्था में योग शुरू करने वाली महिलाओं को चिकित्सक और योग शिक्षक से परामर्श लेकर योग शुरू करना चाहिए.

गर्भावस्था में योग के लाभ (Benefits of Yoga during pregnency)
गर्भावस्था के दौरान योग कई मायने में लाभप्रद है.  आमतौर पर महिलाओं को इस दौरान शरीरिक रूप से कई प्रकार की परेशानियां का सामना करना पड़ता है.  स्वास्थ्य में  उतार चढ़ाव आते रहते हैं.  नसों में खिंचाव होता है.  कुछ स्नायु और जोड़ें ढ़ीले पड़ जाते हैं.  कमर दर्द और पीठ दर्द का सामना करना पड़ता है.  चिन्ताएं,  उद्वेग एवं तरह तरह के विचारों से मानसिक अशांति बनी रहती है.  इस दौरान योग इन समस्याओं से मुक्ति दिलाने में काफी हद तक सहायक होता है.  मेडिटेशन, श्वसन सम्बन्धी योग, हल्के फुल्के शारीरिक गति वाले योग इस अवस्था में लाभप्रद होते हैं.

गर्भावस्था में योग सम्बन्धी सावधानियां
गर्भावस्था के दौरान योग करते समय सावधानियों का विशेष ख्याल रखना होता है.  योग के समय सामान्य सावधानियां हैं

योग मुद्रा
कभी भी लम्बे समय तक एक ही मु्द्रा में नहीं रहना चाहिए.  प्रथम त्रैमास यानी 1-12 सप्ताह के बीच सामान्य सावधानी के तौर पर लम्बे समय तक उल्टा लेटकर योग नहीं करना चाहिए.  लम्बे समय तक उल्टा लेटकर योग करने से गर्भ के भार से शरीर के नीचले हिस्से में रक्त का संचार समुचित प्रकार से नहीं हो पाता है.

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पेट पर दबाव (Avoid Putting Pressure  on Your Abdomen)
गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को ऐसी योग मुद्रा नहीं अपनानी चाहिए जिनमें पेट पर दबाव बने.  इस प्रकार के योग जिनमें पेट के बल लेट कर दोनों पैरों के अंगूठों को दोनों हाथों के अंगूठे से पकड़ना होता है खतरनाक हो सकता है.  इस प्रकार की योग मुद्रा के स्थान पर योग प्रशिक्षक से किसी अन्य मुद्रा की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए.

कष्ट दायक योग
योग सुख, शांति एवं आत्मिक लाभ के लिए किया जाता है.  इस उद्देश्य की प्राप्ति तभी हो सकती है जब योग में सहजता हो.  योग करते समय तकलीफ या कष्ट महसूस नहीं हो.  गर्भवती महिलाओं को योग करते समय जब भी किसी मुद्रा में असहजता महसूस हो उस मुद्रा को नहीं करना चाहिए.  योग करते समय गति का भी ध्यान रखना चाहिए.  शरीर को तेज गति से घुमाना नहीं चाहिए.

मांसपेशियों में तनाव (Avoid Over-Stretching  Your Muscles)
गर्भवती महिलाओं को योग करते समय ऐसे आसनों से बचना चाहिए जिन्हें करते समय मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न होता हो.  विशेष रूप से वैसे आसन जिन्हें करते समय पेट की मांसपेशियों पर बल पड़ता हो वह आसन नहीं करना चाहिए.  इस प्रकार के आसन गर्भ के लिए नुकसान दायक होता है.

शीर्षासन और बैक बैण्ड (Avoid Inverted Poses and Back Bends)
शीर्षासन और बैक बैण्ड वाले योगाभ्यास गर्भ के लिए खतरनाक हो सकता है.  इस अवस्था में शरीर के आगे के भाग में अतरिक्त भार होता है.  इस प्रकार के योग में कमर और मेरूदंड पर बल पड़ सकता है.  इस प्रकार के योग से गर्भावस्था के दौरान बचना चाहिए.

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shivangi March 23, 2009 at 11:52 am

hi, meri prob ye hai ki mera pet bahar ki side nikhla hua hai or mera kamm bhi dinbhar office me baithne ka hai, koi aisa yog bataiye jisse pet ander chala jaye

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