
इसी प्रकार योग के समय पहले कुछ आसान योग करने चाहिए फिर कठिन योगों का अभ्यास करना चाहिए. हल्के फुल्के योग से धीरे धीरे शरीर में लचक आ जाता है जिससे कठिन योग के लिए शरीर तैयार हो जाता है.
जिस प्रकार किसी गाड़ी को सबसे पहले फस्ट गियर में चलाते हैं फिर धीरे धीरे टांप गियर पर ले जाते हैं योग का एक सामान्य नियम यह है कि योग शुरू करते समय कुछ हलके फुल्के आसन करने चाहिए.
इन आसनों से शरीर में उर्जा का संचार होता है और दूसरी बात यह कि इनसे शरीर कठिन योगों के लिए तैयार होता है. अगर हल्के फुल्के आसन की जगह सीधा कठिन आसन ही शुरू किया जाए तो किसी प्रकार की परेशानियां भी आ सकती हैं. गर्दन के योग, कंघे के योग, प्रार्थना मुद्रा कुछ ऐसे ही आसान योग हैं.
ग्रीवा संचालन योग के लाभ (Benefits of Neck stretching exercises)
लाभइस योग से गर्दन से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार की परेशानियां में लाभ मिलता है. इस योग के नियमित अभ्यास से चेहरे पर कांति आती है और गर्दन सुडौल होता है. यह तनाव कम करता है और शरीर के ऊपरी हिस्से को आराम और सुकून देता है. मानसिक तनाव को कम करने में भी यह योग कारगर है. जिन लोगों को लम्बे समय तक गर्दन एक ही स्थिति में रखकर काम करना होता है उनके लिए यह बहुत ही लाभप्रद है.
ग्रीवा संचालन के लिए तैयारी
ग्रीवा संचालन योग बैठ कर आसानी से किया जा सकता है. इसे आराम की मुद्रा में बैठकर, कमल मु्द्रा में बैठकर किया जाता है. चाहें तो इस योग को खड़े रह कर भी कर सकते हैं. इस योग के दौरान गर्दन के मूवमेंट के अनुसार श्वास प्रश्वास करना चाहिए. इस योग के द्वारा श्वसन पर भी नियंत्रण करने का अभ्यास किया जा सकता है. योग में बल की जरूरत नहीं होती है अत योग के क्रम में गर्दन के मूवमेंट को सामान्य बनाए रखना चाहिए. गर्दन को अनावश्य रूप से तानना नहीं चाहिए. ग्रीवा संचालन योग में इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि केवल आपका सिर ही मूवमेंट करे न कि पूरा शरीर.
सावधानियां
जिन लोगों को गर्दन से सम्बन्धित किसी प्रकार की कोई परेशानी हो उन्हें यह योग किसी चिकित्सक की राय से ही करनी चाहिए. स्पांडिलाइसिस और सरवाइकिल की शिकायत जिन्हें हो उन्हें कुशल योग प्रशिक्षक की देख रेख में ही यह योग करना चाहिए. अधिक उर्म के लोगों एवं ब्लड प्रेशर की शिकायत वाले लोगों को भी इस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए.


प्रक्रिया
- सबसे पहले आराम की मुद्रा में बैठना चाहिए. रीढ़ की हड्डी को हमेशा सीधा रखना चाहिए. दोनों हथेलियों को घुटनों पर रखना चाहिए. गर्दन सीधी और आंखें खुली होनी चाहिए.
- सांस छोड़ते हुए ठुड्डी को छाती से सटायें.
- सांस खींचते हुए सिर को पीछे की ओर ले जाएं.
- सांस छोड़ते हुए गर्दन को सामान्य स्थिति में लाएं. इस क्रिया को 5 से 6 बार दुहराएं.
- इसी प्रक्रिया को गरदन के ऊपर और नीचे के बजाय दांये एवं बायें करें.
- गरदन को दांये एवं बांये करने की प्रक्रिया को भी 5 से 6 बार दुहराएं.