
नरसिंह नर और सिंह का मिश्रित स्वरूप है.हिन्दु धर्मशास्त्र में इस रूप को विष्णु का अवतार माना जाता है.योगाभ्यास करते समय इस मुद्रा का अभ्यास किस प्रकार करना चाहिए एवं यह किस प्रकार लाभदायक होता है आइये इसे देखें.
नरसिंह मुद्रा के लाभ – benefits of Narsingh Yoga
नरसिंह मुद्रा पीछे की ओर झुककर किये जाने वाले योगों का अभ्यास करने के लिए कमर में पर्याप्त लचक पैदा करता है.इस योग के अभ्यास से पीठ और रीढ़ की हड्डियों में मजबूती एवं लचीलापन आता है.इस आसन के अभ्यास से छाती फैलती है और फेफड़ों के कार्य करने की क्षमता बढ़ती है.इस योग से तंत्रिका तंत्र भी उर्जावन रहता है.
नरसिंह आसन अवस्था – Narsingh Yoga Technique
नरसिंह आसन का अभ्यास करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि केहुनी कंधे की सीध में हो.अभ्यास के क्रम में हाथों के बल शरीर के ऊपरी भागों को सहारा देकर छाती से शरीर को ऊपर की ओर उठाना चाहिए।
सावधानी
नरसिंह आसन का अभ्यास उस अवस्था में नहीं करना चाहिए जब पीठ में किसी प्रकार की परेशानी हो.कंधों अथवा बाहों में तकलीफ की स्थिति में भी इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए.
योग क्रिया – Narsingh Yoga Step by Step
- स्टेप 1 उलटा लेट जाएं.इस अवस्था में पैर पीछे की ओर सीधा रहना चाहिए.तलवे का ऊपरी भाग ज़मीन से लगा होना चाहिए.दोनों पैरों के बीच 2 से 3 फीट की दूरी होनी चाहिए.
- स्टेप 2 बांहों को सीधा तान कर सामने रखें.हथेलियां ज़मीन से लगी होनी चाहिए.
- स्टेप 3 सिर को ज़मीन से लगाएं.
- स्टेप 4 केहुनियों को मोडें और हाथों को अपनी ओर खींचें.इस अवस्था में दोनों केहुनी कंधों की सीध में होनी चाहिए.केहुनी से आगे का भाग ज़मीन से पूरी तरह लगा होना चाहिए.
- स्टेप 5 उंगलियों को फैलाएं और मध्यमा उंगली को सामने की ओर सीधा रखें.
- स्टेप 6 छाती को ऊपर की ओर उठाएं और प्रत्ये सांस के साथ फैलाव को महसूस करें.
- स्टेप 7 सांस छोड़ते हुए हिप्स और पेड़ू को ज़मीन की ओर धीरे से दबाएं.
- स्टेप 8 सिर को छत की ओर उठा कर रखें और सामने देखें.
- स्टेप 9 इस अवस्था में 15 सेकेंण्ड से 1 मिनट तक बने रहें.