
अष्टांग नमस्कार मुद्रा में शरीर के आठ अंग ज़मीन का स्पर्श करते हैं अत: इसे अष्टांग नमस्कार के नाम से जाना जाता है. इस आसन का अभ्यास कैसे करना चाहिए एवं इसके लाभ हैं आइये इसे देखें.
अष्टांग मुद्रा के लाभ – Benefits of Ashtanga namaskar Yoga
यह मुद्रा पीठ और गर्दन में मौजूद तनाव को दूर करता है.इस आसन के नियमित अभ्यास से छाती, पीठ, कंधे और बाजू शक्तिशाली होते हैं.इस आसन का अभ्यास शरीर को लचीला बनाए रखने के लिए भी किया जा सकता है.इस आसन से फेफड़ों की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है.
अष्टांग आसन अवस्था – Ashtanga namaskar Yoga Technique
इस आसन में शरीर के आठ अंग ज़मीन का स्पर्श करते हैं अत: इसे अष्टांग नमस्कार आसन कहते हैं.इस आसन में ज़मीन का स्पर्श करने वाले अंग ठोढ़ी, छाती, दोनो हाथ, दोनों घुटने और पैर हैं.आसन के क्रम में इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि पेट ज़मीन का स्पर्श नहीं करे.अष्टांग आसन मुद्रा में टेबल मुद्रा, श्वान मुद्रा और सर्प मुद्रा इन तीनों आसनो का अभ्यास होता है.आसन के क्रम में अपने घुटनों के नीचे कम्बल अथवा तौलिया मोड़कर कर रखलें इससे घुटने आरामदायक स्थिति में बने रहेंगे.
सावधानियां
जब गर्दन और कंधो में तकलीफ हो उस समय इस योग मुद्रा का अभ्यास नहीं करना चाहिए.कमर, कोहनी और कलाई में परेशानी की स्थिति में भी इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए.
योग क्रिया = Ashtanga namaskar Yoga Step by Step
- स्टेप 1 टेबल के समान दोनों हथेलियों और घुटनों पर शरीर को स्थापित करें.
- स्टेप 2 केहुनियों को हल्का मोड़ें और पार्श्व भाग को थोड़ा नीचे की ओर झुकाएं.
- स्टेप 3 सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों के बीच छाती को नीचे की ओर झुकाएं.
- स्टेप 4 गर्दन को आगे की ओर खींचे और ठुढ्ढी को ज़मीन से लगाएं.
- स्टेप 5 बाजूओं को कंधे से नीचे झुकाते हुए पीछे की ओर ले जाएं.
- स्टेप 6 पैर की उंगलियों को मोड़ककर तलवे के ऊपर भाग को ज़मीन से लगाएं.
- स्टेप 7 हिप्स को छत की दिशा में उठाएं और रीढ की हड्डियों को लम्वत रखें.
- स्टेप 8 इस मुद्रा में 15 से 30 सेकेंण्ड तक बने रहें.