
भुजंग का अर्थ होता है सांप.जिस प्रकार सर्प का शरीर लचीला होता है उसी प्रकार यह आसन शरीर को लचीला और फुर्तीला बनाये रखने में सक्षम होता है.इस आसन का अभ्यास किस प्रकार करना चाहिए एवं इसके स्टेप कैसे हैं आइये इसे देखें
भुजंग आसन के लाभ – Benefits of Bhujangasana Yoga
भुजंग आसन के नियमित अभ्यास से कमर से सम्बन्धित परेशानियां दूर होती है.यह आसन कमर को अधिक सक्रिय और उर्जावान बनाता है.इस आसन का अभ्यास पीठ और मेरूदंड के लिए भी लाभकारी होता है.शरीर के ये अंग इस आसन के अभ्यास से लचीले और मजबूत होते है.तंत्रिका तंत्र को सुचारू बनाये रखने के लिए भी यह आसन बहुत ही कारगर होता है.इस आसन से छाती फैलती है एवं श्वसन क्रिया पर इसका सकारात्मक प्रभाव होता है.
भुजंग आसन अवस्था – Bhujangasana Yoga Technique
कमर का हिस्सा सबसे आसानी से मुड़ने वाला होता है परंतु दबाव पड़ने पर आपको तकलीफ भी हो सकती है.इस भाग पर अधिक दबाव नहीं पड़े इसलिए पूरे मेरूदंड को एक समान रूप से ऊपर की ओर मोड़ना चाहिए.आसन के क्रम में बाजूओं पर शरीर का भार होता है.अभ्यास के समय शरीर के ऊपरी भाग को मेरूदंड के सहारे ऊपर उठाना चाहिए.आसन में बाहों को उतना की सीधा करना चाहिए जिससे कंधे और कोहनी रिलैक्स रहें.
सावधानियां
अगर पीठ या कमर में किसी प्रकार की कोई परेशानी अथवा तकलीफ है तो भुजंग आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए.
योग क्रिया – Bhujangasana Yoga Step by Step
- स्टेप 1 ज़मीन पर उलटा लेट जाएं.पैर और हिप्स को समान रूप से फैलाकर रखें.
- स्टेप 2 हथेलियों को ज़मीन पर कंधों के सामने रखें.
- स्टेप 3 उंगलियों को बाहर की ओर फैलाएं, मध्यमा उंगली बीच में होनी चाहिए.
- स्टेप 4 सांस छोड़ते हुए पेड़ु को बाहर की ओर दबाएं.
- स्टेप 5 सांस लेते हुए धीरे धीरे मेरूदंड को अंदर की ओर मोड़ें.
- स्टेप 6 धीरे धीरे सिर, नाक और ठुड्डी को ज़मीन से उठाएं.सिर को छत की ओर रखकर सामने देखें.