
नटराज भगवान शंकर को कहा गया है.भगवान शंकर का नर्तक रूप ही नटराज है.योग की यह मुद्रा शरीरिक संतुलन के लिए बहुत ही लाभप्रद है.इस योग का अभ्यास खड़ा रहकर किया जाता है.आप यह योग कैसे कर सकते हैं.इस योग से आपको क्या लाभ मिलता है.इस योग में किसी प्रकार की सावधानी की जरूरत होती है आइये इसे देखें.
नटराज आसन के लाभ – Benefits of Natarajasana Yoga
नटराज आसन के नियमित अभ्यास से अंगो में संतुलन आता है.यह योग मुद्रा फेफड़ों की कार्य क्षमता को बढ़ाता है.इय योग से कंधे मजबूत होते हैं साथ ही बाहों एवं पैरो में दृढ़ता आती है.जिन लोगों को लगातार बैठकर काम करना होता है उनके लिए नटराज आसन बहुत ही लाभप्रद है.मानसिक शांति और ध्यान के लिए भी इस योग का अभ्यास किया जा सकता है.
आसन अवस्था – Natarajasana Yoga Technique
इस आसन का जब आप अभ्यास करते हैं तो धीरे धीरे शरीर में संतुलन बनना शुरू हो जता है.एक बार जब शरीरिक संतुलन स्थापित होने लगता है तब आप इस मुद्रा का अभ्यास बेहतर तरीके से कर पाते हैं.पैरों को अधिक ऊँचाई तक लाना और आगे झुकना आसान हो जाता है.इस मुद्रा को करते समय आपको अपने अंदर नर्तक होने का एहसास करना चाहिए.
सावधानी
जब आपकी कमर में तकलीफ हो उस समय इस योग का अभ्यास नहीं करना चाहिए.कंधों, हिप्स एवं घुटनों में कष्ट होने पर भी इसका अभ्यास रोक देना चाहिए.
योग क्रिया – Natarajasana Yoga Step by Step
- स्टेप 1 सबसे पहले आराम की मुद्रा में खड़े हो जाएं.
- स्टेप 2 शरीर का भार बाएं पैर पर स्थापित करें और दाएं घुटने को धीरे धीरे मोड़ें और पैर को ज़मीन से ऊपर उठाएं.
- स्टेप 3 दाएं पैर को मोड़कर अपने पीछे ले जाएं.
- स्टेप 4 दाएं हाथ से दाएं टखने को पकड़ें.
- स्टेप 5 बाएं बांह को कंधे की ऊँचाई में उठाएं.
- स्टेप 6 सांस छोड़ते हुए बाएं पैर को ज़मीन पर दबाएं और आगे की ओर झुकें.
- स्टेप 7 दांए पैर को शरीर से दूर ले जाएं.
- स्टेप 8 सिर और गर्दन को मेरूदंड की सीध में रखें.
- स्टेप 9 इस मुद्रा में 15 से 30 सेकेण्ड तक बने रहें.