
वीरभद्र आसन की द्वितीय मुद्रा भी पहली मुद्रा के समान लाभप्रद है.इस योग का अभ्यास भी खड़े होकर किया जाता है.इस योग में मूल रूप से पैर, टखना, कंधा और बाजू मूल रूप से भाग लेते हैं.छाती के लिए भी यह अच्छा व्यायाम होता है.इस योग की अवस्था एवं क्रिया क्या है आइये इसे देखें.
वीरभद्र आसन अवस्था – Virabhadrasana Yoga (Warrior Pose II) Posture and Technique
अभ्यास के दौरान कमर को सीधा रखना चाहिए.पिछले पैर के हिप्स आगे की ओर नहीं घुमे इसका ख्याल रखना चाहिए.बाजू, कंधा, हिप्स और पैर एक सीध में होने चाहिए.अपने घुटनों को टखनों की दिशा में रखना चाहिए.इस मुद्रा में दोनों पैर ज़मीन पर दृढ़ता के साथ रखना चाहिए.इस अवस्था में आपके दोनों पैर समानान्तर होने चाहिए ताकि छाती पूरी तरह से फैल सके और बाहें कंधों की सीध में ले जाने पर किसी प्रकार का तनाव नहीं हो.
सावधानी
अगर आपके गर्दन में किसी प्रकार की परेशानी है तो सिर को घुमाकर ऊपर देखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.इस स्थिति में गर्दन को सीधा रखकर सामने देखना चाहिए.जब घुटनों अथवा हिप्स में किसी प्रकार की परेशानी हो समय इस योग का अभ्यास नहीं करना चाहिए.
योग क्रिया – Virabhadrasana Yoga (Warrior Pose II) Step by Step
- स्टेप 1सीधा तनकर खड़े हो जाएं.
- स्टेप 2 अपने दाएं पैर को 2 से 4 फीट आगे ले जाएं.
- स्टेप 3 दाएं पैर को बाहर की तरफ 90 डिग्री. घुमाएं और बाएं पैर को 45 डिग्री.
- स्टेप 4 सांस लेते हुए हाथो को कंधे की ऊँचाई में फैलाएं.
- स्टेप 5 कंधों को आरामदायक स्थिति में रखें.कंधे कान से लगे नहीं होने चाहिए.
- स्टेप 6 सांस लेते हुए दाएं घुटने को हल्के से मोड़ें.इस अवस्था में घुटना दाएं टखने के ऊपर होना चाहिए.इस मुद्रा में बायां पैर सीधा होना चाहिए और तलवा ज़मीन से लगा होना चाहिए.
- स्टेप 7 सिर को दायीं ओर घुमाएं और उंगलियों की सीध में देखने की कोशिश करें.
- स्टेप 8 इस मुद्रा में 30 सेकेण्ड से एक मिनट तक बने रहें.
- स्टेप 9 सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य स्थिति में लौट आएं.