
पंचतारा मुद्रा भी ताडासन की तरह खड़े रहकर किया जाता है. इस योग का नाम पंचतारा मुद्रा इसलिए है क्योंकि इसमें दोनों हाथों, पैरों और सिर की स्थिति तारा की आकृति का बोध कराता है. यह मुद्रा आसन भी है और लाभप्रद भी. इस योग का अभ्यास आप कैसे कर सकते हैं. इसकी स्थिति कैसी है एवं इसका लाभ क्या है आइये इसे देखें.
पंचतारा मुद्रा के लाभ – Benefits of Panchtara Yoga
इस योग मुद्रा के अभ्यास से शरीर में उर्जा का संचार होता है. पंचतारा योग मुद्रा से शरीर में रक्त संचार की गति तेज होती है. यह योग फेफड़ों को गहरी सांस लेने में मदद करता है. मेरूदंड को सही आकार में बनाए रखने के लिए भी यह योग लाभप्रद है.
पंचतारा योग अवस्था – Panchtara Yoga Posture and Technique
पंचतारा योग का अभ्यास करते समय ध्यान रखना चाहिए कि शरीर के अंग पांच बिन्दुओं पर सीधा और तना हो ताकि शरीर तारा के समान दिखाई दे. इस योग में शरीर के पांच बिन्दु हैं सिर, दोनो हाथ और पैर. योग के दौरान सामान्य रूप से गहरी सांसें लेते रहना चाहिए. सांस लेते समय सांसों को शरीर के मध्य भाग में महसूस करना चाहिए. सांस छोड़ते समय उंगलियों, तलवों एवं सिर से होकर सांस निकलता हुआ महसूस करना चाहिए. इस योग मु्द्रा में अगर कंधो में तनाव महसूस हो तो आप हाथों को दोनों ओर फैलाने की जगह हिप्स के पीछे रख सकते हैं.
योग क्रिया – Panchtara Yoga Step by Step
- स्टेप 1 तनकर खड़े हो जाएं.
- स्टेप 2 पैरों को 3 से 5 फीट की दूरी पर समानान्तर रूप से फैलाएं.
- स्टेप 3 बाहों को कंधे की ऊँचाई में फैलाएं. हथेलियां नीचे की ओर हों.
- स्टेप 4 पैरों को ज़मीन की ओर हल्का सा दबाएं और सिर को छत की ओर तानकर रखें.
- स्टेप 5 इस मुद्रा में 30 सेकेण्ड से 1 मिनट तक बने रहें.
- स्टेप 6 क्रमानुसार वापस सामान्य स्थिति में लौट आएं.